पाठकों से निवेदन

इस ब्लोग पर तंत्र, मंत्र, ज्योतिष, वास्तु व अध्यातम के क्षेत्र की जानकारी निस्वार्थ भाव से मानव मात्र के कल्याण के उद्देश्य से दी जाती है तथा मैं कोई भी फीस या चन्दा स्वीकार नहीं करता हुं तथा न हीं दक्षिणा लेकर अनुष्ठान आदि करता हुं ब्लोग पर बताये सभी उपाय आप स्वंय करेगें तो ही लाभ होगा या आपका कोई निकट संबधी निस्वार्थ भाव से आपके लिये करे तो लाभ होगा।
साईं बाबा तथा रामकृष्ण परमहंस मेरे आदर्श है तथा ब्लोग लेखक सबका मालिक एक है के सिद्धान्त में दृढ़ विश्वास रखकर सभी धर्मों व सभी देवी देवताओं को मानता है।इसलिये इस ब्लोग पर सभी धर्मो में बताये गये उपाय दिये जाते हैं आप भी किसी भी देवी देवता को मानते हो उपाय जिस देवी देवता का बताया जावे उसको इसी भाव से करें कि जैसे पखां,बल्ब,फ्रिज अलग अलग कार्य करते हैं परन्तु सभी चलते बिजली की शक्ति से हैं इसी प्रकार इश्वर की शक्ति से संचालित किसी भी देवी देवता की भक्ति करना उसी शाश्वत निराकार उर्जा की भक्ति ही है।आपकी राय,सुझाव व प्रश्न सीधे mckaushik00@yahoo.co.in (read 00 as zero zero) पर मेल कीये जा सकते है।

Monday, August 22, 2016

लाल किताब के अनुसार सूर्य ग्रह लग्न (खाना नं. 1 में) होने का फलादेश


प्रिय पाठको, 
            नमस्कार यह इस श्रखंला का पांचवा आलोख है यदि आप प्रथम बार इस ब्लोग पर आये है तो लाल किताब से ज्योतिष सीखने के लिए कृपया इसको प्रथम भाग से पढना प्रारंभ करें । पूर्व में प्रकाशित तीन भागों के लिंक नीचे दिये जा रहे हैः-
     इस भाग में हम लग्न में ‘‘सूर्य’’ हो तो क्या फलादेश होता है उस पर प्रकाश डालेगे - 
लग्न में सूर्य वाला  राजा की भांति उच्च अफसर होगा ।(यहाॅ यह जानना रोचक होगा कि मेरे एक मित्र श्री रामस्वरूप पारीक जब सामान्य अध्यापक थे तब लाल किताब के इस फलादेश को सुनकर हसें थे परन्तु आज जब उनकी उम्र लगभग 44 वर्ष है तब उनका प्रिन्सिपल (प्रधानाचार्य) में प्रमोशन हो चुका है तथा अभी 16 वर्ष की नोकरी में वो कहा तक जायेगे कहना मुश्किल है 
अतः लाल किताब के इस कथन को हमेशा याद रखें इसके फलादेश में कोई दोष नही होगा यदि दोष होगा तो आपके गणित या आपकी समझ में होगा अर्थात या तो आपकी जन्म पत्रिका गलत बनी होगी या आपने अर्थ सही समझा नही होगा मान लिजिये आप अफसर नही है तो तो आप ‘‘राजा की भांति’’ तो है तथा आपके अधीनस्थो के लिए ‘‘अफसर’’ भी है या आप आज ऐसे उच्च पद पर नहीं है तो उम्र के आगामी दौर में ऐसे उच्च पद पर जा सकते हैं।
ऐसा व्यक्ति शराब पीने से दूर ही रहता है अर्थात शराबी नही बनता तथा धर्म कर्म में रूचि रखता है प्याउ खुलवाना, धर्मशाला बनवाना, मंदिर बनवाना आदि धार्मिक संस्थाओं व समाज सेवा के कार्यो में खासकर प्याउ, कुआ खुदवाना आदि कार्यो में सहायता देने वाला होता है ।
ऐसा व्यक्ति पिता की आखरी आयु तक सेवा करता है ।
ऐसे जातक को अमूमन उसकी पैतृक सम्पति से धन नहीं मिलता या पिता की सम्पति में  अधिकार से कम हिस्सा मिलता है परन्तु ऐसा जातक उपने पुत्र के लिए धन अवश्य छोड़ता है ।
लग्न में सूर्य वाले जातक का जो बुरा (अहित) करने का प्रयास करता है उसका खुद का ही बुरा हो जाता है ।
ऐसा जातक गरीब की सहायता करने को हरदम तैयार रहता है ।
लग्न में सूर्य वाले के शरीर में सांप जैसा गुस्सा होता है (मतलब छेडने पर सांप जैसे फुकारता है वैसे छेडने पर ऐसा जातक गुस्सा करता है बगैर छेडे नहीं करता)
अपने मेहनत के बल पर स्वयं बना अमीर होगा ।
माता पिता व स्वयं की आयु लम्बी होगी (परन्तु सूर्य नं. 1 व शुक्र 7 होतो पिता की आयु लम्बी होने की शर्त नहीं है )
सरकारी सेवा से या सरकारी स्त्रोतो से धन मिलेगा धन कमाने में सफर भी जादा होगा ।
इमानदारी का धन ऐसे जातक को फलता रहता है व बरकत देता है ।
अपनी आखों पर निश्चय करता है परन्तु कानों पर ऐतबार नहीं करता 
यदि सुर्य पहले स्थान में व शुक्र 7 वे स्थान में हो तो ऐसे जातक के पिता उसके बचपन में ही गुजर सकते है व उसकी स्त्री की सेहत मंदी तथा यदि सूर्य 1 शुक्र 7 नं. वाला जातक दिन में स्त्री सहवास करता हो तो स्त्री को तयेदिक (टी.बी.) हो सकती है ।
सुर्य नं. 1 व मगंल नं. 5 हो तो लड़के पैदा हो होकर मरते रहते है या गंभीर बीमारी से ग्रस्त रहते है कृप्या ध्यान रखे मगंल नं. 5 में हो तो ही ये बिन्दु लागु होगा ।
सुर्य नं. 1 व शनि नं. 8 हो तो स्त्री (पत्नी) बार-2 शादिया करने पर भी मरती रहती है या स्त्री बिमार रहती है (उपाय दिन में सहवास न करें). 
उपर पढे हुए दो बिन्दुओं से घबराए नहीं इनका उपाय है -
1. दिन में स्त्री सहवास न करें ।
2. पैतृक मकान में हैण्डपम्प (बोरवेल) खुदवाए 
3. पुत्र के स्वास्थय का ध्यान रखे व मगंल नं. 5 वालों के लिऐ अलग से जो उपाय बताए जावें (आगामी भागो में) उनका ध्यान रखें ।
अगले भाग में लग्न में ‘‘शुक्र’’ होने पर प्रकाश डाला जायेगा ।
     यह श्रखला आपको कैसी लग रही है तथा जन्म पत्रिका व जीवन से इसका किस हद तक मिलान हो रहा है कृप्या कमेटं में अवशय दर्ज करें ताकि पाठकों को लाल किताब ज्योतिष की सत्यता के बारे में जानकारी मिल सके ।
     आपके कमेटं मुझे अगले भाग को शीध्र तैयार करने के लिये भी प्रोत्साहित करेगें साथ ही आप कमेटं में किस ग्रह से सबंधित फलादेश पहले चाहते हैं वो भी लिखें ।

Tuesday, May 17, 2016

लाल किताब के अनुसार शनि प्रथम भाव (लग्न या खाना न. 1) में होने का फलादेश :लाल किताब की सहायता से स्वयं जानिये अपना भविष्य पार्ट - 4,

प्रिय पाठको, 
            नमस्कार यह इस श्रखंला का चैथा आलोख है यदि आप प्रथम बार इस ब्लोग पर आये है तो लाल किताब से ज्योतिष सीखने के लिए कृपया इसको प्रथम भाग से पढना प्रारंभ करें । पूर्व में प्रकाशित तीन भागों के लिंक नीचे दिये जा रहे हैः-

भाग प्रथमः- लाल किताब से ज्योतिष कैसे सीखें 
भाग द्वितीयः- लग्न में गुरू का फलादेश 
भाग तृतीयः- लग्न में राहु का फलादेश 
     इस भाग में हम लग्न में ‘‘शनि’’ हो तो क्या फलादेश होता है उस पर प्रकाश डालेगे - 
           शनि के प्रथम स्थान में होने का फलादेश थोडा कठिन है इसके लिये आप पहले अपनी जन्म पत्रिका (लग्न पत्रिका) हाथ में ले लेवे उसके अनुसार देखे कि क्या आपकी जन्म पत्रिका मे शनि न. 1 के अलावा निम्न में से कोई स्थिति बन रही है ।
शक्र भी खाना न. 1में शनि के साथ है ।
राहु खाना न. 4 केतु खाना न. 10 में है ।
 बुध या शुक्र न. 7 में है । 
या
 मंगल खाना न. 6 से 12 में कही पर भी है ।
(कौनसे खाने में कौनसा ग्रह है यह देखने के लिए इस आलेख का प्रथम भाग जिसका लिंक उपर दिया है वापस ध्यान से पढ़े)
यदि उपर लिखी चार स्थितियों में से एक भी स्थिति बन रही है तो आप भाग्य शाली हैं क्यो कि ऐसी स्थिति में आपका धन व दौलत लगातार बढता रहेगा (मैं क्षमा चाहता हु पर लाल किताब में लिखा है ज्यादातर ऐसी कुण्डली वाले के धन दौलत बढने का कारण बेईमानी, मक्कारी होती है क्यों कि ‘‘पापी का धर्म माया इक्ट्टा करना’’ ऐसा लाल किताब में लिखा है) यदि आपकी कुण्डली में प्रथम खाने में शनि है व उपर दी गयी चार स्थितियों में से कोई भी स्थिति नही बन रही है तो आप निर्धन हो सकते हैं। 
लाल किताब बहुत वैज्ञानिक है इसमें शनि खाना न. 1 वाले के निर्धन होने की पहचान बताई गई है ‘‘जिस्म पर हद से ज्यादा बान हो तो निर्धन होने की पहचान होगी’’ यदि ऐसी संतान (शनि न. 1 में हो व उपर बतायी 4 स्थितियों में से कोई नही बन रही हो) किसी माता-पिता के जन्म लेती है तो संतान के 18 वर्ष की आयु का होने तक माता-पिता की सारी पैतृक सम्पति बिक जाती है अर्थात ऐसी संतान के जन्म के समय माता-पिता बहुत दौलतमंद व खुशी के बाजे बजा रहे होते है परन्तु जैसे-2 संतान की आयु बढती है वैसे-2 उनका पैतृक धन खजाना घटता जाता है व ऐसी संतान के 18 वर्ष की आयु का होने तक एकदम शुन्य हो जाता है ।
(शनि न. 1 व उपर के 4 योग में से कोई नहीं)
लाल किताब की वैज्ञानिकता का एक ओर प्रमाण आप जाॅच सकते है यदि शनि खाना न. 1 में व बुध खाना न. 7 में हो तो ऐसी संतान के जन्म के बाद जन्म लेने वाली संतान लडका (भाई) ही होगी ऐसा लाल किताब कहती है यदि आपकी कुण्डली में ऐसा योग है तो जाॅच करें कि क्या यह सही है कि आपके छोटे भाई तो है पर छोटी बहन नही है व आपके माता-पिता आपके जन्म के समय धनवान थे।
- ज्यादातर ऐसे टेवे वाले की पढाई अधुरी रहती है तथा वो विधा अध्यन में बहुत होशियार नहीं होता ।
- ऐसी जन्म पत्रिका वाला मांगलिक भी हो तो चोर, फरेबी, बेईमान, झगड़ालु,    धोखेबाज हो सकजा है।
- शनि नं. 1 सूर्य नं. 7 में हो तो सरकारी सेवा या सरकारी खजाने से धन प्राप्त नही होता है व यदि होता है तो सेवा बीच में छुट सकती है या धन की वसूली हो सकतीहै या ऐसा धन बरबाद हो सकता है ।
- ऐसे व्यक्ति की 36 से 48 वर्ष की आयु का समय का भी बुरा व्यतित होता है इसमें धन हानी के साथ-2 बीमारीया भी घेर लेती है खासकर के ऐसा तब होता है जब वो इस उम्र में मकान बनवाए विशेषकर ऐसा मकान जिसका दरवाजा पश्चिम में हो शराब का सेवन करे व परायी स्त्रीयों में अवैध सबंध बनावे ।
अब उपाय बताते है -

(1) धन की कमी, निर्धनता के लिए ऐसी जन्म पत्रिका वाला जातक सूर्य का उपाय  करे अर्थात सुर्य को अध्र्य देवे, बदंरो को चने खिलावे, आदित्य हद्वय स्त्रोत का पाढ करे गायत्री मत्रं का जाप करे तो उसकी धन की कमी दुर होगी ।
(2) 36 से 48 वर्ष का आयु में खासकर पश्चिम दिशा में खुलने वाला मकान न बनाए, शराब मासं, व्याभिचार से पूर्णत दूर ही रहे ।
(3) विद्या में रूकावट, बीमारी व दुख आए तब जमीन में सूरमा दबावे, बड़ (बरगद)  के जड़ की मिट्टी को दूध में मिलाकर रोज तिलक लगावे तो सहायता मिलती है।

आगामी आलेख में ‘‘लग्न में सूर्य ग्रह’’ पर प्रकाश डाला जावेगा उससे अगले में ‘‘लग्न में शुक्र ग्रह’’ पर प्रकाश डाला जावेगा आपकी लग्न में जो ग्रह हो उसे कमेटं में लिखे ताकि उस पर भी प्रकाश डाला जा सके । 

Sunday, April 10, 2016

लाल किताब की सहायता से स्वयं जानिये अपना भविष्य पार्ट - 3 (प्रथम भाव लग्न में राहु होने का फलादेश)

प्रिय पाठको, यह इस सीरीज का तीसरा भाग है अतः यदि आप पहली बार इस ब्लोग पर आये है तो कृप्या इसे पहले भाग से पढना प्रारभं करे पहले दो भागो के लिकं निचे दिये जा रहे है - 
1. लाल किताब से ज्योतिष सीखें ( इस सीरीज का भाग-1 ) 
2. लाल किताब के अनुसार प्रथम भाग में गुरू का फलादेश ( इस सीरीज का भाग- 2 ) 
उक्त प्रथम भाग पर आये कमेंटो के वरियता क्रम में सबसे पहले हमने लग्न ( प्रथम भाव ) में गुरू होने का फल पढा था अब प्रथम भाव में राहु हो तो क्या फलादेश होता है इस आलेख में जानेगें । 
 लाल किताब के अनुसार प्रथम भाव ( लग्न ) में राहु होने का फलादेश - 
 जैसा कि हमनें पूर्व में लिखा था लाल किताब एक वैज्ञानिक विधा है इसमें केवल जन्म पत्रिका ही नहीं आपके सबधिंत ग्रह का फलादेश लागु होगा या नही इसके सकेंत भी दिये हैं जैसे आपके पितृ ऋण का योग है परन्तु आपके स्वयं के या  पैतृक घर के सामने या बायी तरफ 20 से 50 कदम दूरी पर मदिंर या पीपल का वृक्ष नही है तो समझें की आपकी जन्म पत्रिका दुरस्त नही है व आपके पितृ ऋण नहीं है। इस प्रकार लग्न में राहु होने की जाॅच करें - 
1.
इस चित्र के अनुसार आपकी अनामिका उगंली के नीचे राहु का वर्गाकार लाईनों वाला निशान होना चाहिये ( पुरूष दांया हाथ स्त्री बांया हाथ देखे ) 
2. लग्न में राहु वाले के जन्म के समय सख्त वर्षा, आंधी तुफान आये होग, उसके जन्म के समय नाना-नानी दोनो ही जीवित होगे । 
3. लग्न में राहु वाले के पैतृक घर के सामने वाले घर में सतांन नही होगी वह घर वीरान होगा । 
 लग्न में राहु वाला जातक धनवान होता है तथाअपने शरीर पर व परिवार पर ज्यादा खर्च करता है । प्रथम भाव में राहु व सातवें भाव में शुक्र हो तो जातक खूब धनवान होता है परन्तु उसकी पत्नी का या पति का स्वास्थ्य खराब रहता है । 
उपाय - 
 1. मरीज के वजन के बराबर जौ चलते पानी में बहा देवे या जौ रात्रि को मरीज के सिरहाने रखकर सुबह जानवरों को खिलादेवे । 
 2. सफाई कर्मचारी को पैसों का दान या मसूर की बगैर छिलके वाली लाल दाल का दान देवे । 
लग्न में ( प्रथम भाव में ) राहु वाले जातक की शादि के समय दहेज में इलैक्ट्रोनिक सामान दिया जावे तो कोई परेशानी नहीं हैं मगर शादि के बाद ऐसा जातक अपने ससुराल या मायके से इलैक्ट्रोनिक आईटम लावे तो उसका सूर्य कमजोर हो जाता है तथा विभिन्न प्रकार की मुसीबतें, लडाई-झगडे जातक को घेर लेते है । 
 प्रथम भाव में राहु व सूर्य 9 वें भाव में हो या सूर्य दुसरे खाने में हो तो जातक धर्म विरूद्, पूजा पाठ से घृणा करने वाला, ससुराल व धर्म स्थानों का अपमान करने वाला होगा । 
 प्रथम भाव में राहु होने पर सूर्य जिस स्थान में बेठा होता है उसके अनुसार फल होता है जो निम्न प्रकार से है ः
 1. राहु प्रथम स्थान में व सूर्य भी प्रथम स्थान हो तो जातक सरकारी नौकरी में होता है परन्तु उसकी सरकारी सेवा में बेबुनियाद वहम से कोई न कोई परेशानी खडी रहती है । 
 उपाय ः- अपने वजन के बराबर कच्चे  चावल को चलती नदी में बहा देवे तो सरकारी सेवा की परेशानी दूर होती है । 
2. राहु प्रथम भाव में व सूर्य 8 वें भाव में हो तो बिना कारण खर्च, फितुलखर्च आदि से जातक पीडीत रहता है । 
उपाय  :-सूर्य की वस्तुओं ( मसूर की दाल, गुड, ताबां ) आदि का दान करें ।  बिल्ली की जेर भूरे कपड़े में बाॅध कर घर में रखे । 
 लग्न में राहु वाले की मानसिक शांति भगं हो रही हो तो चांदि की अगुंठी सबसे  छोटी उगंली में धारण करे ,दूध का दान करे , सूर्य को जल अपर्ण करे तो दिमाग की अशांति दूर होती है । 
सरकारी सेवा में हो तो बगैर प्रमोशन के बार-बार तबादले भी होते हैं । 
यदि मंगल 12 वें खाने में हो तो राहु ग्रह का कोई भी फल नही होता चाहे वो किसी खाने में क्यों न हो ।
अगले भाग में लग्न में शनि होने पर क्या फलादेश होता है उस पर प्रकाश डाला जावेगा आपके प्रथम भाव में जो ग्रह हो उसे कृपया कमेंट में लिखें ताकि आगामी भागों में उन पर प्रकाश डाला जा सके।
lal kitab astrology rahu in first house hindi

Sunday, March 6, 2016

सम्पतिशाली बनने का देवी उपाय का दुर्लभ संयोग

श्री विश्वसार तन्त्र नामक ग्रन्थ में लिखा है कि भौमवती अमावस्या को आधी रात में जब चन्द्रमा शतभिषा नक्षत्र पर हो उस समय जो मनुष्य श्री दुर्गाष्टोतरशतनाम स्तोत्र (shri durgastotarshatnam stotra) को लिखकर उसका पाठ करता है, वो सम्पतिशाली होता है।
यही बात श्री गीताप्रेस गोरखपुर की दुर्गा सप्तशती के पेज १२ पर भी लिखी है। 
में बहुत सालों से इस मुहुर्त को ढूंढ रहा था। पर अमावस्या होती तो भौमवती अमावस्या नहीं होती थी। भौमवती अमावस्या होती तो चन्द्रमा शतभिषा नक्षत्र पर नहीं होता था। 
परन्तु  आज से लगभग 7 वर्ष पहले दिनांक 24.02.2009 मंगलवार को यह मर्हूत मुझे मिला था जब मैने स्वंय भी इसे लिखा था तथा अपने ब्लोग पर भी डाला था । 
सात वर्ष बाद यह फिर से सामने आया है कि अबके  दिनांक 08-03-2016 की जो अमावस्या है वो भौमवती अमावस्या है तथा चन्द्रमा भी शतभिषा नक्षत्र पर है।
आठ मार्च को मंगलवार है मंगलवार के दिन ही स्वामी विवेकानंद को माता जी के साथ साक्षात्कार हुआ था इस दिन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी भी है कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी भी दुर्गा सप्तशती के कीलक स्तोत्र में माता जी की कृपा प्राप्त करने की प्रमुख तिथी है इसी दिन खप्पर पूजा का योग भी है मुझे नहीं लगता ऐसा अमूल्य संयोग वापस आपको मिलेगा।
अतः इस दिन आधी रात में श्री दुर्गाष्टोतरशतनाम स्तोत्र को लिखकर उसका पाठ करें। 
इस दिन चन्द्रमा रात को 11.36 तक ही शतभिषा नक्षत्र पर है इसलिये लगभग रात को 11 बजे स्तोत्र लिखना प्रारंभ करें फिर उसका पाठ कर लेवें इसके बाद लिखे हुये स्तोत्र को लेमिनेशन करवा लेवें व हो सके तो रोज एक बार पाठ कर लेवें। 
लिखना व पाठ करना दोनो रात 11.36 तक पूर्ण करने हैं इसलिये यदि आप धीरे लिखते हैं तो उससे भी पहले लिखना प्रारंभ कर देवें।
बाद में रोज एक बार पाठ करने की आवश्यक शर्त नहीं है यह मैने बतायी है क्यों कि ऐसा लिखा है कि इस स्तोत्र का रोज पाठ करने वाला राज्यलक्ष्मी को प्राप्त कर लेता है राजा उसके दास हो जाते हैं तथा व अपार सम्पदा के साथ मोक्ष प्राप्त करता है इसलिये रोज एक बार पाठ कर लेना घाटे का सौदा नहीं है।।
यह स्तोत्र श्री गीताप्रेस गोरखपुर की दुर्गा सप्तशती के पेज ८-१२ पर दिया है या निम्न लिन्क से दुर्गा सप्तशती डाउनलोड कर लेवें।
कृपया ज्यादा से ज्यादा शेयर करके इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में सहभागी बने 
निवेदक
महेश चन्द्र कौशिक
keywords:- shatbhisha nashatra in devi puja powerfull devi stotra to getting rich vishvasar tantra shri durga saptashati, download shri durga saptashati hindi pdf

Wednesday, February 10, 2016

लाल किताब की सहायता से स्वंय जानिये अपना भविष्य भाग-2 ( प्रथम भाव में गुरू ) Learn Lal Kitab Astrology Hindi Part 2 Guru in First House

 इस आलोख को पढने से पूर्व यह निवेदन है कि आप इसको शुरू से ( भाग-1 से) पढें । इस आलेख का प्रथम भाग पढने के लिये यहाॅ क्लिक करे -
उक्त पूर्व आलेख पर सर्वप्रथम टिप्पणी श्री पवन गुप्ता जी की प्राप्त हुयी है जिनके जन्म कुण्डली के प्रथम भाव में गुरू स्थित है तो आज हम जानते है कि लाल किताब के अनुसार प्रथम भाव में गुरू स्थित होने का क्या फलादेश है। 
हस्तरेखा -
लाल किताब इतने वैज्ञानिक तरीके पर आधारित है कि इसमें जन्म कुण्डली के अनुसार आपकी हस्तरेखाए भी बतायी गयी है ।यदि आप पुरूष है तो अपना दांया हाथ व यदि आप स्त्री है तो अपना बांया हाथ देखे यहां पर जो चित्र दिया जा रहा है उसमे तीन निशान दिये गये हैं एक कनिष्ठा अंगुली व अनामिका अंगुली के लगभग मध्य में (ज्यादा अनामिका उंगली की तरफ ) अग्रेजी अक्षर Y जैसा निशान हैं ।दुसरा अग्रेंजी अक्षर U जैसा निशान है जो कनिष्ठा उंगली के लगभग नीचे होता है ।
 तीसरा तर्जनी अंगली के नीचे से जो लम्बी रेखा जाती है वो कलाई के पास तीर की तरह दो शाखाओं में फट जाती है यदि आपकी कुण्डली सही है तो इन तीनो निशानो में से कम से कम एक या दो या तीनो ही आपकी हथेली में हैं तो ही लाल किताब के अनुसार आपकी लग्न कुण्डली में प्रथम स्थान में गुरू स्थित है ।
 यदि आपकी हस्तरेखा में कुण्डली के प्रथम स्थान में गुरू होने के इन तीन सकेंतो में से एक, दो या तीनो सकेंत है तो ही ये फलादेश आप पर लागू होगा यदि ये निशान नहीं है तो सभंव है कि आपकी कुण्डली गलत बनी हो उसमें जन्म समय,स्थान आदि में कोई अतंर हो । 
 यदि प्रथम भाव में सिर्फ गुरू हो दुसरा कोई ग्रह नहीं हो व सातवें भाव में भी कोई न कोई ग्रह हो मतलब सातवां खाना खाली नहीं हो तो जातक पढाई में होशियार होता है तथा बी.ए. या उससे भी उॅची डीग्री पास होता है तथा अपनी विधा के बल पर धनवान बन सकता है । 
 पहले खाने में गुरू व पाॅचवे खाने में बुध हो तो राजयोग बनता है अर्थात राजा की तरह होता है । 
 प्रथम भाव मेें गुरू वाले का भाग्य अपने दिमाग से ( दुसरो की सलाह न मानकर अपने दिमाग से काम करने पर ) व सरकारी कार्मिको के साथ मित्रता रखने पर बढता है ऐसे व्यक्ति को अपना भाग्य जगाने के लिए - 
1. धर्म पर चलना चाहिए (धर्म का अर्थ यहां इमानदारी, व नैतिकता का आचरण माना जावे ) 
2. दयालुता रखनी चाहिए । 
3. दुसरो की सलाह की जगह अपनी अतंरात्मा की माननी चाहिए । 
4. सरकारी कर्मचारियों व अधिकारीयों से मित्रता व सम्पर्क रखाना चाहिए ।
 आम तौर पर प्रथम स्थान में गुरू वाले लोगों की आखें की दृष्टि कभी खराब नहीं होती तथा उनके चश्मा नहीं लगता यदि फीर भी लगा है तो सूर्य का उपाय ( चाशुषोपनिषद ) करने से हट सकता है । 
 इस भाव वाले जातक शेर की तरह गुस्सा होते हुए भी साफ दिल के शांत वृति के मनुष्य होतें है जिनमें चालाकी को फोरन समझने ओर रोक देने की शक्ति होती है । शत्रुओं के होते हुए भी ऐसे जातक डरते नहीं है तथा विजय सदा साथ देती है। 
 परन्तु प्रथत भाव में गुरू होने के साथ यदि सातवां भाव खाली हो तो गुरू का पुरा लाभ नहीं होता ऐसे व्यक्ति का भाग्य शादी के बाद पत्नी से व ससुराल वालो से अच्छें सबंध बनाये रखे तो ही ज्यादा तरक्की करता है । ऐसे जातक ( प्रथम भाव में गुरू व सातवा खाली ) वाले की शादी 28 वर्ष की आयु से पुर्व कर दी जावे तो उसके पिता को हृदय व ब्लड प्रैशर आदि बीमारियां हो सकती है।
 दरअसल प्रथम भाव में गुरू व सातवां भाव रिक्त वाले जातक के पिता को अमुमन हद्वय की बीमारियां होने के आसार होते है। ऐसी स्थिति कब ज्यादा लागू होती है जब 
1. गुरू प्रथम व सातवा खाली या राहु आठवें या शनि सातवे भाव में हो तो जातक के पिता को हद्वयघात,अस्थमा, दिल की बीमारियों के होने के ज्यादा चासं होते है इसलिए ऐसे जातक पिता जी के उचित व्यायाम ,खानपान का ध्यान रखें । 
2. ऐसे जातक की शादि 24 वें से 27 वें साल के मध्य कर दी जावे तब 
 3. जातक के लडका पैदा होने के बाद 
 4. जातक के अपनी कमाई से मकान बनाने पर 
 ऐसा जातक 27-28 साल की आयु में पिता से अलग भी हो सकता है उसकी पिता से अनबन या बोलचान बंद हो सकती है । 
 उपाय - पिताजी की सेहत अच्छी रखने व दीघार्यु के लिये जातक को 400ग्राम गुड़@ खाण्ड़ @शक्कर निर्जन स्थान में दबा कर आनी चाहिये ।
 इस जातक की माता इसके लिये अच्छी होती है परन्तु इसकी माता व इसकी पत्नी में सबंध अच्छे नहीं होते । लग्न में गुरू वाजे जातक की 50 वर्ष की आय पूर्ण होने पर उसके 51 वे वर्ष में  उसकी माता का स्वास्थ्य गंभीर हो सकता है ( कृपया ध्यान रखे ऐसा होगा ही ये आवश्यक नहीं है इसमें अन्य खानो के ग्रह माता के खुद के ग्रह भी देखने चाहिये व ईश्वर इच्छा भी बलवती है लाल किताब जो कि मूल रूप से उर्दु भाषा में है उसमे भी लिखा है ‘‘ये दुनियावी हिसाबकिताब है कोई दावा ए खुदाई नहीं ।’’)
प्रथम स्थान में गुरू व सातवें स्थान में मंगल हो तो व्यक्ति जागीरदार परिवार से या खानदानी रईस परिवार से होता है ।
सूर्य खाना सं. 9 में हो व गुरू 1 में हो तो ऐसे व्यक्ति की खुद की आयु व उसके परिवार की आयु भी उसकी इच्छानुसार लम्बी होती है। 
 लग्न में गुरू वाला व्यक्ति यदि निर्धन हो तो उसको किसी के आगे हाथ नही फेला कर अपने भाग्य पर सतोंष रखना चाहिये तो वो धनवान बन सकता है । 
पितृ ऋण - लग्न में गुरू वाले के 2, 5, 9 वें व 12 वें स्थान में यदि बुध, शुक्र, शनि व राहु में से कोई भी ग्रह हो तो ये स्थिति पितृ ऋण कहलाती है ( यद्पि पहले में गुरू च 5 वें में बुध हो तो राजयोग भी होता है ।) पितृ ऋण का अर्थ है पिछले जन्म में पितरों, पूर्वजों, पिता व कुलगुरू का अपमान किया था उसका श्राप भोगना पड़ता है पितृ ऋण से क्या-क्या होता है जानिए -
1. पितृ ऋण की स्थिति में जातक की 8 से 21 वर्ष की आयु दुखद संघर्षमय बीतती है। 
2. गुरू प्रथम व शनि 5 वें में होना भी पितृ ऋण का घोतक है ऐसे में 36 वर्ष की आयु से 49 वर्ष की आयु के बीच ‘‘ बुरे कामों के जोर से स्वास्थ्य खराब पेशाब ओर शौच जाने की नाली तक दुखने लगे ’’ ऐसा लाल किताब कहती है इसका अर्थ है कि 36 वर्ष से 49 वर्ष के बीच ऐसे जातक यदि बुरे काम ( यौन सबंध ज्यादा बनाने में रहना ) करता है तो उसको बवासीर, शौच के समय जलन, प्रोस्टेट की बीमारी, पेशाब में जलन हो सकती है । साथ ही भाग्य साथ नहीं देवे दिल हिला देने वाले काम हो जो दुख देवे डरावनी घटनाए हो । 
 इस आयु के मध्य खुद के बनाए मकान पाप ओर गुनाह के ठिकाने बन जावे इन मकानों में रहने से खुद व सतांन बीमार रहे 
 इसका उपाय यह है - 1. यौन सबधों में शुचिता, नैतिकता बनाये रखे व ज्यादा कामुक न बनें । 
2. 400 ग्राम बादाम हनुमानजी, शनि के मदिंर में ले जावे आधे वहा चढाकर आधे प्रसाद के रूप में घर में ले आवें व हमेशा घर में रखे ( एयर टाईट पैक करके रखें ताकि खराब नहीं होवे ये बादाम जिदंगी भर रखें अगर खराब हो जावे तो नदी में प्रवाहित करके वापस करे )
 3. गुरू प्रथम व शनि 9 हो तो स्वयं का स्वास्थ्य खराब रहता है ( उपाय वही ब्रहमचर्य या यौन सबधं नैतिक व कम से कम उचित समय अतंराल से ही बनाए) 
4. गुरू प्रथम व शनि 7 में हो तो पिता से अलग होने के योग है । 
5. पितृ ऋण से आपकी उच्य शिक्षा में अड़चने आती रहेगी जब भी उच्य शिक्षा का प्रयास करेगें बीच में ही छोड़ना पडेगा। 
 पितृ ऋण की पहचान - अपने पैतृक घर , स्वयं के बनवाए घर के दरवाजे पर जाकर खड़े हो जावे । अपने सामनें देखे आपके सामनें  से 20 कदम से 50 कदम दुर या आपके बायें तरफ 20 कदम से 50 कदम दुर कोई पीपल का पेड़ , मंदिर है तो पितृ ऋण ओर भी पुख्ता है।
 भगवान ने वही इलाज भी दिया है इस पीपल के पेड़ में पानी देना, इसकी देखभाल करना व उस मंदिर में सहायता देना मंदिर में रहने वाले पुजारी , पुरोहित की सेवा करना ही पितृ ऋण का सबसे बड़ा उपाय है ।
प्रथम भाव में गुरू होने व ग्रहों से बने अन्य योग 1. प्रथम गुरू ओर राहु 8 या 11 में हो तो आखें खराब हो सकती है पिता को दमा, हार्ट की बीमारिया हो सकती है खुद का दिमाग बिगड जावे या टागों की बीमारी टांग कापना, टांग सूखना आदि बीमारीया हो सकती है । 
2. प्रथम गुरू व सूर्य 9 या 11 में तो मुकदमा बाजी , दीवानी उलझनो में धन हानी ( चाहे फैसला जातक के हक में ही हो ) परन्तु भाग्य खराब व हिम्मत जबाब दे देगी । 
 3. प्रथम गुरू व 8 या 11 में बुध, शुक्र, राहु व शनि हो तो जातक दूसरो की निदां करे व दुसरो को श्राप देवे इससे उल्टा असर होगा व दुसरो की निदां करने व श्राप देने से ऐसे जातक का खुद का बुरा होगा । 
 विशेष - लग्न ( प्रथम भाव ) में गुरू वाले सभी जातक दूसरो की निदां, चुगली व श्राप देना तो छोड ही देवे इसमे ही वो बरबाद होते है ।
क्रमशः अगला भाग 15-20 दिन में प्रकाशित होगा ।
 आपकी जन्म पत्रिका के लग्न में जो ग्रह हो वो कमेंट में लिखे अगले 2 भागों में राहु ग्रह एंव शनि ग्रह लग्न में होने पर प्रकाश डाला जायेगा ।
आपकी लग्न में गुरू , राहु, शनि के अलावा कोई ग्रह हो तो कमेंट में लिखे ताकि उससे अगला भाग उस ग्रह पर लिखा जा सके ।
इस आलेख का अगला भाग निम्न लिंक पर पढें:-

लाल किताब की सहायता से स्वयं जानिये अपना भविष्य पार्ट - 3 (प्रथम भाव लग्न में राहु होने का फलादेश)

Featured Post

भूत देखने के लिये प्रयोग

आप भूत प्रेत नहीं मानते हो तों एक सरल सा प्रयोग मैं आपको बता देता हूं ताकि आप भूत जी के दर्शनों का लाभ उठा सकें यह प्रयोग मुझे एक तांत्रिक ...

Google+ Followers